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भव्य और अलौकिक: त्रिकुटा पर्वत की गोद में माँ वैष्…
भव्य और अलौकिक: त्रिकुटा पर्वत की गोद में माँ वैष्णो का दिव्य दरबार।
Reshma Singh Vlogs
Jun 29, 2026
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Description
भाग 1: माता का अवतरण (कहानी की शुरुआत)
"पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग में जब धरती पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ गया, तब तीनों देवियों—महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती—ने अपनी सम्मिलित शक्ति से एक कन्या को जन्म दिया। इस दिव्य कन्या का नाम 'वैष्णवी' रखा गया। बचपन से ही उनमें अद्भुत तेज था। बड़ी होने पर उन्होंने भगवान विष्णु की घोर तपस्या की, ताकि वे उन्हें पति रूप में प्राप्त कर सकें। लेकिन भगवान विष्णु ने कहा कि वे कलियुग में 'कल्कि अवतार' लेंगे, तब वे उनसे विवाह करेंगे। तब तक, वैष्णवी को धरती के कल्याण के लिए तपस्या करने का आदेश दिया गया।"
भाग 2: भैरवनाथ का अहंकार और माता की रक्षा
"तपस्या के दौरान, दुष्ट भैरवनाथ ने माता का पीछा करना शुरू किया। माता ने अपनी रक्षा के लिए त्रिकुटा पर्वत की ओर प्रस्थान किया। मार्ग में उन्होंने हनुमान जी को अपनी रक्षा के लिए नियुक्त किया और एक गुफा में छिप गईं। जब भैरवनाथ ने गुफा तक पहुँचकर माता को ललकारा, तब माता ने महाकाली का रूप धारण किया और त्रिशूल से भैरव का वध कर दिया। मरते समय भैरव को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने माता से क्षमा मांगी। माता ने उसे वरदान दिया कि जो भी भक्त मेरे दर्शन करने आएगा, उसे तब तक पूर्ण फल नहीं मिलेगा जब तक वह भैरव के दर्शन नहीं करेगा। इसीलिए आज भी श्रद्धालु वैष्णो देवी के बाद भैरव घाटी की यात्रा जरूर करते हैं।"
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